वर्तमान सच

वर्तमान सच

सरकार के पास ग्रामीण विकास का रोडमैप नहीं है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था नव-उदारवादी शक्तियों के अधीन हो गई है। सिर्फ अधिकतम समर्थन मूल्य या सब्सिडी या फिर कर्जमाफी किसानों की खुशहाली के लिए पर्याप्त नहीं है। किसानों की खुशहाली गांवों के आर्थिक विकास से जुड़ी है। यह तभी सम्भव है, जब कृषि को सीधे उद्योग से जोड़ा जाए। उत्पादन से लेकर उत्पाद की सफाई, छंटाई, प्रक्रमण इकाई व मार्केटिंग यूनिट की व्यवस्था और सुविधा गांव-ब्लॉक स्तर पर हो। खेतों में हुए उत्पादन का भंडारण करने की रणनीति बनाई जाए। हर ब्लॉक में अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज और ताप नियंत्रित भंडारण हों, इसके लिए सरकार को मदद करनी चाहिए। सरकार के एजेंडे से भारत का किसान गायब है। किसान को फसल का दाम कैसे मिलेगा, फसल या खेती लाभकारी कैसे होगी। खेती की जमीन छिनने से कैसे बचाई जाए? और किसान की फसल कैसे बिचैलियों के जाल से मुक्त होकर सीधे उपभोक्ता तक पहुचे? इस पर न तो राज्य सरकारों का ध्यान है और न केन्द्र सरकार का।

देश की जीडीपी में किसानों का योगदान लगातार घटता जा रहा है। आजादी से लेकर अब तक यह 50 फीसदी से घट कर महज 17 फीसदी रह गया है, जबकि इस पर 58 फीसदी लोग निर्भर है। कृषि की दुर्दशा किसानों की हालत को भी दर्शाती है। इसकी मूल वजह यह है कि कृषि सरकार की प्राथमिकता में नही है। सरकारें उद्योगपतियों को लाखों करोड़ों रूपए की छूट तो दे सकती है, लेकिन देश के ग्रामीण इलाकों और किसानों की समस्याओं के प्रति उनका दृष्टिकोण निराशाजनक है।

समय बदल रहा है विज्ञान तकनीक और सूचना क्रांति के माध्यम से भारत के किसानों की समस्याएं बड़ी आसानी से हल की जा सकती है। खुशहाल किसान, खुशहाल गांव और खुशहाल देश का सपना सच हो सकता है, बस नीयत और नीति की जरूरत है। बदलती हुई वैश्विक परिस्थितियों के बीच किसान आंदोलन के चरित्र में भी बदलाव आया है। किसान आंदोलन की प्रमाणिता इसके उद्देश्य पर निर्भर है। हम देश के सभी किसानों और किसान संगठनों के सामने एक सुझाव-पत्र प्रस्तुत कर रहे है, ताकि सभी किसान और उनके संगठन एकमत होकर अपना मांग-पत्र बनाएं और सरकार के सामने पेशकर उसे लागू करवाएं।

भूमि अधिग्रहण बिल 2017 में बदलाव की जरूरत है। मुआवजे और बाकी विवादित मुद्दों पर सरकार किसान संगठनों के साथ बातचीत कर नया सर्वमान्य बिल तैयार करे।

इस समय सरकारी नीतियों की वजह से हो रही किसानों की आत्महत्या सबसे ज्वलंत प्रश्न है। किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए एक समग्र नीति की आवश्यकता है। किसानों की मौत की जिम्मेदारी तय हो। जिला स्तर के अधिकारियों को किसानों की आत्महत्या के लिए जवाबदेह बनाया जाए।

किसानों की फसलों की कीमत का आकलन स्वामीनाथन रिपोर्ट के मुताबिक हो। फसलों की कीमत उत्पादन लागत से अधिक होनी चाहिए।

किसानों के उत्पाद को बाजार से जोडने के लिए अविलम्ब नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, ताकि कृषि उत्पादन में बाजार के मुताबिक बदलाव में तेजी आ सके।

अनाजों की बर्बादी रोकने के लिए ब्लॉक और पंचायत स्तर पर अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज के निर्माण के लिए सरकार एक समर्थन नीति बनाए। ब्लॉक स्तर पर ही अनाज के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज बनाएं जाएं। कोल्ड स्टोरेज बनाने का काम ब्लॉक में रहने वाले लोगों की इसके मापदंड और किराएं की जिम्मेदारी सरकार की हो।

हर गांव में इंटरनेट की सुविधा के साथ-साथ पंचायत को इंटरनेट (इंफार्मेशन-हाइवे) के माध्यम से जोडने और गांवों में ही युवाओं और महिलाओं के लिए कम्प्यूटर ट्रेनिंग की व्यवस्था हो।

आईटीआई की तर्ज पर हर न्याय पंचायत में आधुनिक खेती का ट्रेनिंग सेंटर खोलने का प्रावधान हो, ताकि किसान नई तकनीक, नए यंत्रों के बारे में जानकारी हासिल कर सकें और साथ ही सीधे बाजार से जुड सकें।

किसानों की लिए एक नई नीति की घोषणा हो। जिस प्रकार से युवाओं का उधमी बनाने के लिए सरकार ने स्टार्ट-अप इंडिया की शुरूआत की, उसी प्रकार कृषि के क्षेत्र में भी व्यवसाय के प्रोत्साहन के लिए नीति बनाएं।

कृषि-बीमा का नया प्रारूप तैयार किया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि सूखा, बेमौसम बरसात, बाढ़, पाला व आंधी-तूफान से फसल बर्बाद होने पर किसानों को त्वरित राहत मिल सके।

अभी तक किये गये गरीबों, मज़दूरों, किसानों के बीमा की जाँच कराई जाये। मछली बीमा, फसल बीमा, किसान बीमा, पशुपालन बीमा के माध्यम से बीमा कम्पनियों की लूट की जाँच की जाये और जाँच में दोषी पाये जाने वालो पर सख्त कारवाही हो।

किसानों की न्यून्तम आमदनी तय की जाए। एक किसान आय आयोग का गठन किया जाएं, जो भूमिहीन कृषि मज़दूरों, भूमिहीन किसानों और छोटे किसानों की जरूरतों के मुताबिक नीति बनाए।

जैव परिवर्तित फसलों, उनके प्रदर्शन, व्यापारिक और परिवर्तित बीज-पौधों पर पूर्णतः प्रतिबंध लगे।

कृषि उत्पादन को बिचैलियों से बचाने और उसे उद्योगों की श्रंखला देश के हर ब्लॉक में बनाई जाए और उनमें नौजवानों के लिए रोजगार की व्यवस्था हो । इसके लिए यह आवश्यक है कि किसान को स्वावलम्बी और खेती को लाभदायक बनाने के लिए हर ब्लाॅक में स्थानीय कच्चे माल के आधार पर औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएं।

केन्द्र और राज्य सरकारें देश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पानी, 24 घण्टे बिजली, स्वास्थ्य सेवायें, शिक्षा व्यवस्था और सड़कों को प्राथमिकता दें।

सरकार जिन फसलों को किसानों से खरीदती है, उसकी क्रय-प्राक्रिया इलेक्ट्रानिक और अविलम्ब भुगतान की नई व्यवस्था लागू होनी चाहिए।

कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर किसा जाए व देश में सभी तरह के कृषि-उत्पादों के आयात पर रोक लगाई जाए।

सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए किसान संगठनों और प्रतिनिधिमण्डलों से वार्ता के लिए संस्थागत संवैधानिक व्यवस्था बनाए, ताकि किसानों की मांग नीति में लक्षित हो सकें।

मिलावटखोरी के खिलाफ कड़े कानूनों का प्रावधान हो।

गांवों के स्कूल का संचालन स्थानीय लोगों के हाथों में हो। हर स्कूल में स्थानीय उपज और उनसे जुडी जानकारियों का समावेश पाठ्यक्रम में हो।

गांवों में बांध, नहर, सड़क या किसी भी निर्माण की निगरानी और प्रगति पर नजर रखने की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों के हाथ हो।

राज्य सरकारों के कृषि विभाग की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह समय पर इस बात की घोषण करे कि आने वाले एक-दो वर्षों में किन-किन फसलों की कब और कितनी कमी होगी, ताकि किसान अपनी फसलों के उत्पाद का स्वरूप जरूरत के मुताबिक तय कर सकें।

बिना ब्याज कृषि ऋण उपलब्ध कराया जाए।

केन्द्र और राज्य सरकारों को घोषणा करनी चाहिए कि वे देश के सभी ग्रामीण उत्पादन ईकाइयों का समान गुणवत्ता के आधार पर प्राथमिकता के तौर पर खरीदेंगी। सेना, पुलिस, मिड-डे-मिल जैसी योजनाओं में जहां खाद्यानों व कृषि उत्पाद को सरकार सीधे सप्लाई करती है, वहां का सारा सामान बाजार से न खरीद कर ग्रामीण औद्योगिक इकाइयों से खरीदने का प्रावधान होना चाहिए।

सभी किसान भाईयों से अपील है कि अपने-अपने परिवार के भविष्य और पुरखों से पायी विरासत और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट हो और जाति, धर्म, की लड़ाई से ऊपर उठकर सिर्फ किसान हित की लड़ाई लड़े, ये देश किसानों का है यह देश गाँवों का देश है और हम आखिरी दम तक इसे बचाने का संकल्प करें। हर घर से एक नौजवान गाँव की लडाई लड़ने के लिए आगे आए और अपने गाँव को सम्मान दिलाये और अपने किसान भाइयों को समृद्ध बनाए। अगर आप जल्द ही सभी किसान और उनसे जुड़े लोग नहीं जागे तो वह दिन दूर नहीं जब कम्पनी राज होगा और हम सब गुलामों की तरह उनके यहाँ होगें।

क्या हम अपने शहीदों का बलिदान व्यर्थ जाने देंगे, अगर गाँव नही, किसान नही, तो यह हिन्दुस्तान भी कहां रहेगा? संगठन में बहुत ताकत होती है, आप से अपील है कि आप सब लोग संगठित हो जाएं और हर लड़ाई को लड़कर अपना हक हासिल करें।

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