लेख
किसान

किसान

#लोकतंत्र का #महापर्व चल रहा। लगभग आधे से अधिक सीटों पर #मतदान सम्पन्न हो चुका है। #नामदार से लेकर #कामदार तक बातें खूब उछल रही हैं।#मौसम के साथ- साथ #सियासी पारा भी #चरम पर है। आरोप प्रत्यारोप का दौर खूब चल रहा है। लेकिन अगर कोई मुद्दा #शून्य है तो वह है #किसान। एक ज़माना था, जब हमारे देश में #खेती को सबसे #उत्तम कार्य माना जाता था। महाकवि #घाघ की एक प्रसिद्ध कहावत है। बहुत सटीक होती

किसान भाई सदैव याद रखें

किसान भाई सदैव याद रखें

किसान भाई सदैव याद रखें जब तक आप किसान होकर संगठित रहेंगे और अपने हक के लिए संघपरित रहेंगे तब तक दुनिया की कोई शक्ति आप का सुख चैन शक्ति और समृद्धि नहीं छीन सकती है परन्तु जब आप जाति शीर्षक व धर्म शीर्षक की राजनीति में संलिप्त हो जायेंगे तब दुनिया की कोई ताकत

वर्तमान सच

वर्तमान सच

वर्तमान सच सरकार के पास ग्रामीण विकास का रोडमैप नहीं है, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था नव-उदारवादी शक्तियों के अधीन हो गई है। सिर्फ अधिकतम समर्थन मूल्य या सब्सिडी या फिर कर्जमाफी किसानों की खुशहाली के लिए पर्याप्त नहीं है। किसानों की खुशहाली गांवों के आर्थिक विकास से जुड़ी है। यह तभी सम्भव है, जब कृषि

एक अपील आपसे

एक अपील आपसे

एक अपील आपसे देश में सबसे ज्यादा किसान भाई और परिवार हैं, पर वह ही सबसे ज्यादा परेशान है और सरकारी कुचक्र का शिकार है। देश में सभी वर्गों को तरक्की करने के लिए सरकारें तमाम सुविधाएं प्रदान करती है परन्तु किसानों को नहीं क्यों? देश में जितनी भी योजनाएं बनती है उसमें सबसे ज्यादा